मैं अपनी नौकरी से इस्तीफा दे कर अपने पति के साथ रहने लगी.जब नौकरी थी तब मरीजों के साथ २४ घंटे ब्यस्त रहती थी, घर में बच्चों और पति के साथ समय बिताने का समय हिन् नहीं मिलता था.सोचा था नौकरी छोर कर जो मजा आज तक नहीं उठाया, वो उठा लूंगी.कुछ दिन तो कालोनी लाइफ खूब एन्जॉय किया,पर जब मेरे पति साउथ में एक सीमेंट कंपनी ज्वाइन किए तभी से मेरे लोनेलिनेस का सिलसिला शुरू हुआ.भाषा तो जान ती नही थी , ऊपर से शहर के बहार का लोकेशन, मुझे दिन भर अकेले बैठे रहना परता था , जो की मेरे पेर्सोनालिटी के साथ तालमेल नही खता था,मुझे धीरे धीरे लोनेलिनेस ने आ घेरा। मैं जी जान से कोशिश करती हूँ लोगों के साथ कम्युनिकेशन करने का पर तेलेगु के बिना किस्सी से दोस्ती नहीं कर पाई हूँ.मैं पेशे से डॉक्टर हूँ, तो कोई अल्तेर्नातिवे जॉब भी नही कर पा रही हूँ, अपने पुराने दोस्तों से फ़ोन पर बातें कर के मन बहला लेती हूँ.मुझे बार बार यही डर लग रहा है , की अगर मेरे पति का कहीं नॉर्थ में जल्दी ट्रान्सफर नहीं हुआ, तो कही मैं अकेले पण के कारन पेर्मनेंत्ली डिप्रेशन में न हाली जाऊं। फिर लोग मुझे पागल कह कर तिरस्कार न करने लगें.शहर से इतनी कट ऑफ़ है ये जगह की मैं अपने आप से कुछ कर भी नही पा रही हूँ। बच्चे भी अपनी नै नौकरी में खुश हैं, मैं उन्हें उपनी तकलीफ बता कर उनको परेशां नही करना चाहती.मुझे समझ में नही आ रहा की में अपने आप को किस तरह ब्यास्ता रखू। सोशल वर्क करने के लिए भी तो लोकल भाषा का ज्ञान जरूरी है।
Will someone provide me some assistance as to how to keep myself from going mad.
Thursday, November 5, 2009
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