राज थाच्केरय का मराठी प्रेमआए दिन न्यूज़ में पढ़ने को मिलता है। कभी देखने को नहीं मिलता। क्या बात है?मराठी से उन्हें इतना ही प्यार है तो कभी मराठी लोगों के लिए कुछ भलाई करते हुए नही दिखे.जब दिखे तो मंच पर से आग उगलते हुए। लोगों को भड़का कर ,आपस का भाई चारा खत्म करते हुए दिखे.जो लोग आपस में इतने दिनों से मिलजुल कर शांतिपूर्वक रहा रहे थे उनके बीच नफरत पैदा कर के वो बहुत गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं.जिन मासूम लोगों की मौत इस दंगे में हुई ,क्या उनकी आह उनको नही लगेगी?वो क्या सोंच रहे हैं की , इस तरह वो इलेक्शन जीत कर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बन जायंगे.अगर इतना ही आसन होता तो आज तक सारे अंडरवर्ल्ड के राजा मुख्यमंत्री बन गए होते। हम अगर बुरा करेंगे तो बुरा हीन फल पाएंगे।
अगर उन्हें इतना हीन महाराष्ट्र से प्यार है तो वो मराठियों के लिए कुछ अपनी mehnat से क्यूँ नही करते? बारिश में मुंबई के रस्ते तालाब बन जाते हैं, कितने गरीब मराठी होंगे जिन्हें रोजी रोटी नही मिल्तिहै ,कितने गरीब बच्चे होंगे जो गरीबी के कारन पढ़ाई नहीं पुरी कर पाते हैं, लोकल ट्रेन में औरतों के साथ छेड़छाड़ होती है इत्यादि। इन सब समाज सुधारक कार्यों को नहीं करते बल्कि जो सब से आसन काम है ,लोगों को भड़काऊ भाषण से भड़कान, वोह बहुत जोर शोर से कर रहे हैं। इसमें इनका कोई mehnat भी नही लगता, लोगों को भड़का दिया ,लोग आपस में लड़ कर मर रहे हैं,और नाम रोशन उनका हो रहा है।
सच्चे समाज सुधारक कभीभी गद्दी की तरफ़ नज़र नहीं रखते थे.उदहारण के लिए, बाबा आमटे, मदर टेरेसा jean द्रेज़ इत्यादि.
Friday, June 20, 2008
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